
इतिहास और ऐतिहासिक विरासत
ओडिशा के तटीय क्षेत्र में स्थित कोणार्क सूर्य मन्दिर 13वीं शताब्दी का एक विशाल मन्दिर है जो सूर्य देव को समर्पित है। इसका निर्माण पूर्वी गंग राजवंश के राजा लांगुला नरसिंहदेव प्रथम द्वारा 1250 ईस्वी के आसपास करवाया गया था। यह मन्दिर एक विशाल रथ के आकार में बना है जिसमें 24 पहिये और 7 घोड़े हैं। ये पहिये न केवल अलंकृत हैं बल्कि धूपघड़ी का भी काम करते हैं। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल है।
तीर्थयात्रियों द्वारा दी गई ताज़ा जानकारी
काव्य कथा (स्थल पुराण)
"पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग का शाप मिला था। उन्होंने चंद्रभागा नदी के तट पर १२ वर्षों तक सूर्य देव की कठिन तपस्या की। सूर्य देव ने प्रसन्न होकर उन्हें रोगमुक्त किया, जिसके बाद साम्ब ने यहाँ सूर्य मंदिर का निर्माण कराया।"
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विस्तृत मार्गदर्शिका और परिवहन रसद
निकटतम हवाई अड्डा
Biju Patnaik International Airport (BBI), Bhubaneswar - 64 km
स्थानीय बस मार्ग
उपलब्ध बस संख्या: OTDC Tourist Buses from Puri/Bhubaneswar, Local private buses from Puri bus stand
रेलवे स्टेशन और संपर्क ट्रेनें
- Puri Railway Station (PURI) - Major terminal station connected nationwide, 31 km from Konark. Regular buses run to Konark.