
इतिहास और ऐतिहासिक विरासत
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय रेंज में मंदाकिनी नदी के समीप स्थित केदारनाथ मन्दिर भारत के सबसे पूजनीय शिव मन्दिरों में से एक है। यह सबसे ऊंचाई पर स्थित ज्योतिर्लिंग है और चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मन्दिर का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया था, और बाद में आदि शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया। अत्यधिक बर्फबारी के कारण यह मन्दिर केवल मई से नवंबर के बीच ही खुलता है।
तीर्थयात्रियों द्वारा दी गई ताज़ा जानकारी
काव्य कथा (स्थल पुराण)
"महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने गोत्र-वध के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव को ढूंढ रहे थे। शिवजी उनसे छिपकर केदारनाथ में एक बैल के रूप में विचरने लगे। जब भीम ने उन्हें पहचान लिया, तो शिवजी धरती में समाने लगे। भीम ने उनकी पीठ का कूबड़ पकड़ लिया। पांडवों की भक्ति देखकर शिवजी प्रसन्न हुए और केदारनाथ में स्थापित हुए।"
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विस्तृत मार्गदर्शिका और परिवहन रसद
निकटतम हवाई अड्डा
Jolly Grant Airport (DED), Dehradun - 238 km
स्थानीय बस मार्ग
उपलब्ध बस संख्या: GMOU/Himgiri Buses from Haridwar/Rishikesh to Sonprayag, 16 km trek/pony/helicopter from Gaurikund
रेलवे स्टेशन और संपर्क ट्रेनें
- Rishikesh Railway Station (RKSH) - Nearest railhead (216 km from Gaurikund). Buses and taxis operate to Gaurikund.