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ज्वालामुखी मन्दिर (कांगड़ा)

ज्वालामुखी मन्दिर (कांगड़ा)

Jwalamukhi Town, Kangra District, Himachal Pradesh 176031

इतिहास और ऐतिहासिक विरासत

हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में स्थित ज्वालामुखी मन्दिर १५वां प्रमुख अष्टदश शक्तिपीठ है, जहाँ देवी सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी। मन्दिर में कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि चट्टान की दरारों से निकलने वाली प्राकृतिक नौ ज्वालाओं की पूजा की जाती है। मुग़ल सम्राट अकबर ने इन ज्वालाओं को बुझाने का निष्फल प्रयास किया था, जिसके बाद नतमस्तक होकर उसने मन्दिर में सोने का छत्र चढ़ाया था।

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काव्य कथा (स्थल पुराण)

"यहाँ देवी सती की जिह्वा गिरी थी। मन्दिर में निरंतर जलने वाली नौ ज्वालाएं देवी के नौ रूपों (महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजना) का प्रतिनिधित्व करती हैं।"

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विस्तृत मार्गदर्शिका और परिवहन रसद

निकटतम हवाई अड्डा

Gaggal Airport, Dharamshala - 46 km

स्थानीय बस मार्ग

उपलब्ध बस संख्या: Regular Himachal Road Transport Corporation (HRTC) buses from Dharamshala, Kangra, and Shimla to Jwalamukhi

रेलवे स्टेशन और संपर्क ट्रेनें

  • Pathankot Junction (PTK) - 120 km from temple, well connected to Delhi and Amritsar railway networks.

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